म भ रत बरस क हरदम अम त सम म न करत ह यह क च दन म ट ट क ह ग णग न करत ह म झ च त नह ह स वर ग ज कर म क ष प न क त र ग ह कफ़न म र बस यह अरम न रखत ह क छ नश त र ग क आन क ह क छ नश म त भ म क श न क ह हम लहर ए ग हर जगह य त र ग नश य ह द स त न क श न क ह

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

कुछ  नशा  तिरंगे की आन का है , कुछ नशा मातृभूमि  की शान का है !
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा , नशा ये  हिंदुस्तान की शान का है !

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ
यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,
तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

कुछ नशा तिरंगे की आन का है , कुछ नशा मातृभूमि की शान का है !
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा , नशा ये हिंदुस्तान की शान का है !

मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ। कुछ नशा तिरंगे की आन का है , कुछ नशा मातृभूमि की शान का है ! हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा , नशा ये हिंदुस्तान की शान का है !

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